Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 700
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1सब ते बड़े थे राम गोविंद राधे।
2उनकी थी नारि नाम सीता बता दे॥ 8108॥
3सीता को लै गया गोविंद राधे।
4रावण हरि निज लंका बता दे॥ 8109॥
5यह सुनि चट उठि गोविंद राधे।
6बैठे लाला रौद्र स्वरूप दिखा दे॥ 8110॥
7लाला कह लछिमन गोविंद राधे।
8कहाँ है धनुष मेरा वेगि ला दे ला दे॥ 8111॥
9मैया डरी लाला को गोविंद राधे।
10गोद ले उर आँचल में छिपा दे॥ 8112॥
11पुनि राई नोन लै के गोविंद राधे।
12सात बार तनु पै उतारि बहा दे॥ 8113॥
13फणी ज्यों मणि बिनु गोविंद राधे।
14एक क्षण भी रहि सके ना बता दे॥ 8114॥
15ऐसे ही मैया बाबा गोविंद राधे।
16कृष्ण बिनु क्षण रहि सकेंना बता दे॥ 8115॥
17याते जब कृष्ण गये गोविंद राधे।
18रास में गोपियों के साथ बता दे॥ 8116॥
19तब भी एक रूप ते थे गोविंद राधे।
20मैया बाबा के पास में भी बता दे॥ 8117॥