Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 699
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1लाया रसगुल्ला सँग गोविंद राधे।
2मनसुख कह मैया कान्ह को खिला दे॥ 8096॥
3रसगुल्ला नाम सुनि गोविंद राधे।
4कान्ह निज होंठ चाटे उठे ना बता दे॥ 8097॥
5तू कह तो मैया गोविंद राधे।
6भृगु को बुलाऊँ भृगु तुरत जगा दे॥ 8098॥
7भृगु नाम सुनि कान्ह गोविंद राधे।
8उठि बैठे किन्तु दृग बन्द हैं बता दे॥ 8099॥
9बार बार जँभुआत गोविंद राधे।
10श्यामगात मात पकरे हैं बता दे॥ 8100॥
11बार बार खोलें दृग गोविंद राधे।
12देखें पुनि करें दृग बंद बता दे॥ 8101॥
13कान्ह को जगा ना मैया गोविंद राधे।
14साँझ को जगाना और कमरी उढ़ा दे॥ 8102॥
15बाबा कह मेरी माने गोविंद राधे।
16उठु कान्ह मेरी खड़ाउँ तो ला दे॥ 8103॥
17एक साँझ लाला बोले गोविंद राधे।
18आ मैया एक कहानी सुना दे॥ 8104॥
19मैया बोली सुनु लाला गोविंद राधे।
20थे नृप दशरथ अवध के बता दे॥ 8105॥
21उनके थे चार सुत गोविंद राधे।
22नारि कौशल्या आदि तीन थीं बता दे॥ 8106॥
23सुत राम लछिमन गोविंद राधे।
24भरत शत्रुघन नाम बता दे॥ 8107॥