Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 698
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1तू तो कहे मैया लाला गोविंद राधे।
2तेरा सुख चाहूँ पुनि काहे को जगा दे॥ 8084॥
3सुख है सुषुप्ति का गोविंद राधे।
4सब ते बड़ा मैया काहे को जगा दे॥ 8085॥
5कभू मैया लोरी गा के गोविंद राधे।
6मोहिं सुला दे कभू आके जगा दे॥ 8086॥
7अभी नहीं जागूँ मैया गोविंद राधे।
8पेट में है पीड़ा कोउ वैद्य को बुला दे॥ 8087॥
9मैं तो तब जागूँ मैया गोविंद राधे।
10जब मोहिं दुलहिन बड़ी सी मँगा दे॥ 8088॥
11भैया कह सुनु मैया गोविंद राधे।
12मुख पै कन्हैया केजल छिरका दे॥ 8089॥
13भैया के भी बैन सुनि गोविंद राधे।
14कुँवर कन्हैया नैन खुलें ना बता दे॥ 8090॥
15उठे ना कन्हैया कह गोविंद राधे।
16मैया और सोने दे भैया को भगा दे॥ 8091॥
17भैया कह सो ले सो ले गोविंद राधे।
18ग्वाल संग जात मधुवन हौं बता दे॥ 8092॥
19भैया कह इकलो जो गोविंद राधे।
20जाय मधुवन तू तो हउवा डरा दे॥ 8093॥
21कनुआ न जागे यदि गोविंद राधे।
22सारा नवनीत बलुआ को खिला दे॥ 8094॥
23सो जा सो जा कान्ह गोविंद राधे।
24आ बलुआ तोहिं हलुआ खिला दे॥ 8095॥