Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 697
Reading 195 of 452 · Source nos. 8072–8083 · Source PDF 200
1जाग जाग मेरे प्राण गोविंद राधे।
2ग्वाल द्वार खड़े कहें कान्ह को जगा दे॥ 8072॥
3सोने दे सोने दे मैया गोविंद राधे।
4डाटि फटकार ग्वाल द्वार ते भगा दे॥ 8073॥
5सोने दे सोने दे मैया गोविंद राधे।
6जा जा तू तो साँझ को ही भोर बता दे॥ 8074॥
7सोने दे सोने दे मैया गोविंद राधे।
8नींद है अधूरी अभी काहे को जगा दे॥ 8075॥
9सोने दे सोने दे मैया गोविंद राधे।
10आजा तू भी सो जा मोहिं उर ते लगा दे॥ 8076॥
11सोने दे सोने दे मैया गोविंद राधे।
12पहले तू जा के मैया भैया को जगा दे॥ 8077॥
13जागु जागु लाला न तु गोविंद राधे।
14बाबा को बुलाऊँ बाबा डाटि केजगा दे॥ 8078॥
15अभी रात बीती नहिं गोविंद राधे।
16ऐसा कहि मैया जा के बाबा को सुला दे॥ 8079॥
17बाबा यदि आवें तो गोविंद राधे।
18रात ही ते लाला को ज्वर है बता दे॥ 8080॥
19बाबा जो न मानें कहु गोविंद राधे।
20लाला नारायणध्यान मग्न है बता दे॥ 8081॥
21सुनु मैया आजु ते गोविंद राधे।
22जब मैं बुलाऊँ तब आके जगा दे॥ 8082॥
23मैया तोहिं चिंता कछु गोविंद राधे।
24रात भर जागे मोहिं काहे को जगा दे॥ 8083॥