Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 695
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1आग के पिवैया को गोविंद राधे।
2रण ते भगैया को मैया जगा दे॥ 8048॥
3मुक्ति के दिवैया को गोविंद राधे।
4माया के नसैया को मैया जगा दे॥ 8049॥
5इन्द्र हरैया को गोविंद राधे।
6दधि के लुटैया को मैया जगा दे॥ 8050॥
7कंस के मरैया को गोविंद राधे।
8द्वारिका बसैया को मैया जगा दे॥ 8051॥
9भैरवी सुना दे गाई गोविंद राधे।
10थोड़ा हिला दे माई कान्ह को जगा दे॥ 8052॥
11कामरी उठा दे मैया गोविंद राधे।
12काँख गुदगुदा दे, सोते कान्ह को जगा दे॥ 8053॥
13कामरी उठा दे मैया गोविंद राधे।
14कान्ह को जगा दे वाय छी छी करा दे॥ 8054॥
15जागे ना कन्हैया यदि गोविंद राधे।
16कामरी उठा के मैया भू पै बिठा दे॥ 8055॥
17जागे ना जगाये जो तो गोविंद राधे।
18कान्ह कान ढिग ढप ढोल बजा दे॥ 8056॥
19जागे ना जगाये जो तो गोविंद राधे।
20माखन मिश्री मैया होंठ में लगा दे॥ 8057॥
21जागे ना जगाये जो तो गोविंद राधे।
22हउवा आ रहा है कहि कान्ह को डरा दे॥ 8058॥
23जागे ना जो कान्ह मैया गोविंद राधे।
24पूतना की माई आई कान में बता दे॥ 8059॥