Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 692
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1खेल में हरा के सखा गोविंद राधे।
2सर्वद्रष्टा की आँख पट्टी बँधा दें॥ 8012॥
3ग्वारिया गँवार बनि गोविंद राधे।
4ब्रह्म ग्वालसुख हित ग्वालों को जिता दे॥ 8013॥
5धन्य भाग्य गोपवृन्द गोविंद राधे।
6जिनको सनातन मित्र ब्रह्म बता दे॥ 8014॥
7ग्राम्य ग्वाल बाल प्रेम गोविंद राधे।
8हरि ते ग्राम्य लीला करवा दे॥ 8015॥
9ब्रज बालसखा कृष्ण गोविंद राधे।
10सुदामा अर्जुन आदि हैं बता दे॥ 8016॥
11सोने की बेला आई गोविंद राधे।
12कोई कहानी कहि कान्ह को सुला दे॥ 8017॥
13सोने की बेला आई गोविंद राधे।
14लोरी सुना केमाई कान्ह को सुला दे॥ 8018॥
15सोने की बेला आई गोविंद राधे।
16आ रही है जँभुआई कान्ह को सुला दे॥ 8019॥
17सोने की बेला आई गोविंद राधे।
18पीठ थपथपा केमाई लाल को सुला दे॥ 8020॥
19सोने की बेला आई गोविंद राधे।
20उर ते लगा के माई कान्ह को सुला दे॥ 8021॥
21सोेना तो है हरि लीला गोविंद राधे।
22साँचो सोना तो जग प्रलय करा दे॥ 8022॥
23कोई सोये तम युक्त गोविंद राधे।
24कोई सोये ब्रह्म की समाधि बता दे॥ 8023॥