Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 691
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1ग्वाल बाल कहें मेरा गोविंद राधे।
2नाम गिरिधारी कनुआ को बता दे॥ 8000॥
3अँगुरी लगाया कान्हा गोविंद राधे।
4मैंने तो लठिया लगाया था बता दे॥ 8001॥
5यज्ञों में इन्द्र पूजा गोविंद राधे।
6ग्वाल अँगुठाछाप अँगुठा दिखा दें॥ 8002॥
7ग्वाल कहें इन्द्र-मुँह गोविंद राधे।
8काला करि चौरासी कोस घुमा दे॥ 8003॥
9मनसुखा श्याम ते भी गोविंद राधे।
10कान पकड़ा के उठ्ठक बैठक करा दे॥ 8004॥
11खेल ते निकालो कान्ह गोविंद राधे।
12हारि जाये मुँह लटकाये दाँव ना दे॥ 8005॥
13खेल ते निकाल देंगे गोविंद राधे।
14ऐसा कहि धनसुख श्याम को रुला दे॥ 8006॥
15मुरली छिना ले गाय गोविंद राधे।
16चरे नहीं बार बार मुरली बजा दे॥ 8007॥
17सखा कहे लड्डू खा ले गोविंद राधे।
18श्याम मुख खोलैं तब अन्य को खिला दे॥ 8008॥
19सखा खाये दही बड़ा गोविंद राधे।
20श्याम जब माँगें सखा अँगुठा दिखा दे॥ 8009॥
21सखा खाये पकवान गोविंद राधे।
22सबते स्वादिष्ट जो हो कान्ह को खिला दे॥ 8010॥
23श्याम सँग खेलें सखा गोविंद राधे।
24लुका छिपी खेल सखा श्याम को हरा दें॥ 8011॥