Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 687
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1संग में हैं भैया गोविंद राधे।
2मनसुख आदि सखावृंद बता दे॥ 7952॥
3वंशीवट जाके गोविंद राधे।
4बैठे तरु छाया में बता दे॥ 7953॥
5गैया चरन लागीं गोविंद राधे।
6हरी हरी घास बड़े चाव ते बता दे॥ 7954॥
7चारों ओर सखा सब गोविंद राधे।
8बीच में बैठे कन्हैया बता दे॥ 7955॥
9मुरली मधुर तान गोविंद राधे।
10छेड़ी कान्ह ने तबहीं बता दे॥ 7956॥
11यह मनमोहिनी गोविंद राधे।
12झाँकी लखें विधि हरि हर बता दे॥ 7957॥
13उत ते जो जाय सो गोविंद राधे।
14रु क जाय देखे झाँकी बता दे॥ 7958॥
15गैयान कानन को गोविंद राधे।
16दोना बनाय सुनैं तान बता दे॥ 7959॥
17छोटे बड़े सखा सब गोविंद राधे।
18हास परिहास करें कान्ह सों बता दे॥ 7960॥
19ब्रज की रमणी भी गोविंद राधे।
20लखि श्याम तनु सुधि भूलीं बता दे॥ 7961॥
21जहाँ बैठे घनश्याम गोविंद राधे।
22तहाँ भइ भीर गोपियों की बता दे॥ 7962॥
23नभ में विमानन गोविंद राधे।
24बैठी लखें देव अंगनायें बता दे॥ 7963॥