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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

लीला माधुरी · पृष्ठ 681

Reading 179 of 452 · Source nos. 7880–7891 · Source PDF 184

1अस्तु कृष्ण वृक्षों के गोविंद राधे।

2बीच में होके गये बाहर बता दे॥ 7880॥

3ऊखल अटका मध्य गोविंद राधे।

4कृष्ण ने झटका गिरे वृक्ष बता दे॥ 7881॥

5वृक्ष ते निकले दो गोविंद राधे।

6यक्ष पुत्र कृष्ण की की अस्तुति बता दे॥ 7882॥

7बाबा ने रस्सी खोला गोविंद राधे।

8उर ते लगाया चूमा लाला को बता दे॥ 7883॥

9मैया यशोदा ने गोविंद राधे।

10जो कृपा प्रसाद पाया ब्रज में बता दे॥ 7884॥

11वह पुत्र ब्रह्मा शिव गोविंद राधे।

12लक्ष्मी भी नाहिं पा सकी थीं बता दे॥ 7885॥

13ब्रह्म तो था मुक्तिदाता गोविंद राधे।

14ब्रज में यशोदा वाय ऊखल बँधा दे॥ 7886॥

15वेदों में ढूँढे ब्रह्म गोविंद राधे।

16ब्रह्म रोवै बँधा ब्रज ऊखल दिखा दे॥ 7887॥

17जब हरि ऊखल गोविंद राधे।

18बँध गये मैया के द्वारा बता दे॥ 7888॥

19तब कहा शुक जी ने गोविंद राधे।

20हरि बँधे प्राकृत नर ज्यों बता दे॥ 7889॥

21याते यह सिद्ध हुआ गोविंद राधे।

22हरि तनु चिदानन्दमय था बता दे॥ 7890॥

23हरि की लीला कछु गोविंद राधे।

24लौकिक कछु थी दिव्य बता दे॥ 7891॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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