Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 680
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1एक दिन वे दोनों गोविंद राधे।
2मंदाकिनी के तट पै बता दे॥ 7868॥
3नाना रमणियों ते गोविंद राधे।
4नाना बिहार कर रहे थे बता दे॥ 7869॥
5दोनों कुबेर पुत्र गोविंद राधे।
6मदिरा पी के प्रमत्त थे बता दे॥ 7870॥
7इतने में नारद जी गोविंद राधे।
8घूमते हुये वहीं आये बता दे॥ 7871॥
9दोनों थे वस्त्रहीन गोविंद राधे।
10रमणियाँ भी वस्त्रहीन थीं बता दे॥ 7872॥
11उन रमणियों ने तो गोविंद राधे।
12नारद लखि वस्त्र धारे बता दे॥ 7873॥
13किन्तु यक्ष पुत्रों ने गोविंद राधे।
14मदवश वस्त्र नहिं धारे बता दे॥ 7874॥
15नारद ने सोचा दोनों गोविंद राधे।
16देवपुत्र मर्यादाहीन बता दे॥ 7875॥
17नारद ने दोनों पै गोविंद राधे।
18कृपा करने की बात सोची बता दे॥ 7876॥
19नारद ने तब दिया गोविंद राधे।
20दोनों को ही शाप बता दे॥ 7877॥
21तुम दोनों नंगे याते गोविंद राधे।
22नंगी वृक्ष योनि में जाओ बता दे॥ 7878॥
23मेरी कृपा ते रहे गोविंद राधे।
24वृक्ष योनि में भी हरि स्मरण बता दे॥ 7879॥