Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 678
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1मैया थी भोरी भारी गोविंद राधे।
2नाहिं जानती थी लाला ब्रह्म है बता दे॥ 7844॥
3जिसमें न बाहर है गोविंद राधे।
4जिसमें न भीतर है कृष्ण बता दे॥ 7845॥
5जिसकी न आदि है गोविंद राधे।
6जिसका ना अन्त है कृष्ण बता दे॥ 7846॥
7जो जग पूर्व भी था गोविंद राधे।
8जो प्रलय बाद भी कृष्ण बता दे॥ 7847॥
9जो जग भीतर भी गोविंद राधे।
10जो जग बाहर भी कृष्ण बता दे॥ 7848॥
11जो इन्द्रियों ते परे गोविंद राधे।
12अव्यक्त है सर्वव्यापी बता दे॥ 7849॥
13उसे निज शिशु मानि गोविंद राधे।
14मैया ऊखल बाँधने चली बता दे॥ 7850॥
15उसी समय कृष्ण की गोविंद राधे।
16आपु आई ऐश्वर्य शक्ति बता दे॥ 7851॥
17ऐश्वर्य शक्ति ने गोविंद राधे।
18रस्सी को दो अंगुल छोटी की बता दे॥ 7852॥
19मैया ज्यों जोड़े रस्सी गोविंद राधे।
20त्यों त्यों दो अंगुल छोटी हो बता दे॥ 7853॥
21घर की सारी रस्सी गोविंद राधे।
22जोड़ने पर भी रही छोटी बता दे॥ 7854॥
23गोपियाँ अरु मैया गोविंद राधे।
24यह अचरज लखि चकित बता दे॥ 7855॥