Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 677
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1थोड़ी देर में ही मैया गोविंद राधे।
2थकि गई गति भई धीमी बता दे॥ 7832॥
3वेणी की गाँठ भी गोविंद राधे।
4मैया की ढीली पड़ गई बता दे॥ 7833॥
5ज्यों ज्यों दौड़े मैया गोविंद राधे।
6त्यों त्यों गिरें फूल वेणी के बता दे॥ 7834॥
7जैसे तैसे मैया ने गोविंद राधे।
8पकड़ लिया निज लाला को बता दे॥ 7835॥
9लाला को पकरि मैया गोविंद राधे।
10डरपाया धमकाया बता दे॥ 7836॥
11डरे हुये लाला की गोविंद राधे।
12झाँकी बस देखने योग्य थी बता दे॥ 7837॥
13सारा तनु काँपे अरु गोविंद राधे।
14आँखों ते बहे अश्रुधारा बता दे॥ 7838॥
15हाथों ते आँखों को गोविंद राधे।
16बार बार मलते थे लाला बता दे॥ 7839॥
17आँखों ते काजल गोविंद राधे।
18आँसुओं ते बहि आये गाल बता दे॥ 7840॥
19डरे हुये लाला को गोविंद राधे।
20लखि आई मैया को करु णा बता दे॥ 7841॥
21मैया ने हाथ की गोविंद राधे।
22साँटी को दिया तुरत फेंक बता दे॥ 7842॥
23पुनि सोचा मैया ने गोविंद राधे।
24रस्सी ते याको आज बाँध दूँ बता दे॥ 7843॥