Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 675
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1कर के कंकन गोविंद राधे।
2कर्ण कर्णफूल हिल रहे थे बता दे॥ 7808॥
3मुख पै पसीना था गोविंद राधे।
4चोटी के पुष्प गिर रहे थे बता दे॥ 7809॥
5उसी समय औचक गोविंद राधे।
6स्तन्यपान हित आये लाला बता दे॥ 7810॥
7लाला ने आते ही गोविंद राधे।
8मैया की मथानी को पकड़ा बता दे॥ 7811॥
9पुनि लाला मैया की गोविंद राधे।
10गोद में बरबस चढ़ गये बता दे॥ 7812॥
11मैया विभोर हो के गोविंद राधे।
12दूध पिलाने लगी थी बता दे॥ 7813॥
13इतने में पास ही में गोविंद राधे।
14दूध अँगीठी का उफना बता दे॥ 7814॥
15मैया ने लाला को गोविंद राधे।
16बिठा दिया भू पै तुरत बता दे॥ 7815॥
17लाला को बिठा के मैया गोविंद राधे।
18दूध उतारने चली गई बता दे॥ 7816॥
19लाला को आया क्रोध गोविंद राधे।
20पास पड़े लोढ़े को उठाया बता दे॥ 7817॥
21क्रोध में लाला ने गोविंद राधे।
22दही की मटुकी फोड़ा बता दे॥ 7818॥
23क्रोध में लाला गये गोविंद राधे।
24पास एक ग्वालिनी के घर में बता दे॥ 7819॥