Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 674
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1वैष्णवी माया ने गोविंद राधे।
2भगवत्ज्ञान भुलाया बता दे॥ 7796॥
3मैया सब भूलि गई गोविंद राधे।
4कान्ह को उठाया गोद में बता दे॥ 7797॥
5पूर्व के समान पुनि गोविंद राधे।
6हुआ ज्ञान मेरा लाल है बता दे॥ 7798॥
7लाल बाल बाल बचे गोविंद राधे।
8गये ग्वाल बाल निज घर को बता दे॥ 7799॥
9कृष्ण की माया लखि गोविंद राधे।
10बलराम भी मुसकुराये बता दे॥ 7800॥
11मैया ने लाल को गोविंद राधे।
12चूमा चिपटाया किया लाड़ बता दे॥ 7801॥
13एक बार नन्दरानी गोविंद राधे।
14आपु ही दधि मथने लगीं बता दे॥ 7802॥
15शतशः दासियाँ थीं गोविंद राधे।
16सोचा निज कर मथि लाला को खिला दे॥ 7803॥
17दधि मथते समय गोविंद राधे।
18कृष्ण बाल लीला सोचें गायें बता दे॥ 7804॥
19स्थूल कटि भाग में तो गोविंद राधे।
20सूत ते बँधा लहँगा पहिरे बता दे॥ 7805॥
21पुत्र स्नेह बहुलता ते गोविंद राधे।
22दोनों स्तनों ते दूध चूता था बता दे॥ 7806॥
23नेति को खींचि खींचि गोविंद राधे।
24बाहें भी कछु थक गई थीं बता दे॥ 7807॥