Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 673
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1किन्तु बिनु मेरे तो गोविंद राधे।
2स्वामी आज पिट जायेंगे बता दे॥ 7784॥
3ऐश्वर्य शक्ति ने गोविंद राधे।
4मुख में दिखा दिया विश्व बता दे॥ 7785॥
5जड़ जंगम जग गोविंद राधे।
6पंच महाभूत सूर्य चन्द्र बता दे॥ 7786॥
7प्रकृति महान अहं गोविंद राधे।
8पंच तन्मात्रा त्रिगुण बता दे॥ 7787॥
9नन्हें से मुख में गोविंद राधे।
10देखा असंख्य ब्रह्माण्ड बता दे॥ 7788॥
11मैया ने सोचा यह गोविंद राधे।
12स्वप्न है या कोई माया बता दे॥ 7789॥
13कहीं मेरी बुद्धि ही गोविंद राधे।
14भ्रम युक्त तो नहिं हो गई बता दे॥ 7790॥
15अथवा इस कान्ह की गोविंद राधे।
16कोई है योग सिद्धि बता दे॥ 7791॥
17मैं जानूँ मेरा सुत गोविंद राधे।
18है भगवान अवतार बता दे॥ 7792॥
19हाथ ते छूटी साँटी गोविंद राधे।
20तन ते छूटा पसीना बता दे॥ 7793॥
21पूर्व ज्यों डरे लाल गोविंद राधे।
22ऐसे ही डरी अब मैया बता दे॥ 7794॥
23कृष्ण ने बुलाया अब गोविंद राधे।
24वैष्णवी निज माया बता दे॥ 7795॥