Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 672
Reading 170 of 452 · Source nos. 7772–7783 · Source PDF 175
1देख ले मुख, हाथ गोविंद राधे।
2कंगन को आरसी क्या बता दे॥ 7772॥
3सोचा कन्हैया ने गोविंद राधे।
4इमि कहि बचि जावूँगा बता दे॥ 7773॥
5किन्तु मैया तो गोविंद राधे।
6चतुरों में भी चतुर बता दे॥ 7774॥
7मैया ने कहा मेरे गोविंद राधे।
8बाल धूप में नहिं श्वेत बता दे॥ 7775॥
9मैं सब जानूँ हूँ गोविंद राधे।
10अच्छा खोल मुख देखूँ बता दे॥ 7776॥
11सोचे कन्हैया मन गोविंद राधे।
12मुख खोलूँ माटी दीखे बता दे॥ 7777॥
13मुख नहिं खोलूँ तो गोविंद राधे।
14मैया मानि ले साँची बता दे॥ 7778॥
15मैया के कर में थी गोविंद राधे।
16पतरी पतरी साँटी बता दे॥ 7779॥
17देखा कन्हैया ने गोविंद राधे।
18मैया के कर में साँटी बता दे॥ 7780॥
19डर के कारण गोविंद राधे।
20खुल गया मुख आपु लाल का बता दे॥ 7781॥
21कृष्ण भगवान की गोविंद राधे।
22सोचे ऐश्वर्य शक्ति बता दे॥ 7782॥
23यद्यपि ब्रज में गोविंद राधे।
24मेरा आना मना है बता दे॥ 7783॥