Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 669
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1कोउ कह ऐसा रूप गोविंद राधे।
2सारे संसार में कहीं ना बता दे॥ 7736॥
3कोउ कह आँख देखो गोविंद राधे।
4मानो भरा रससिन्धु बता दे॥ 7737॥
5कोउ कह मुसकनि गोविंद राधे।
6जो भी देखे वाय लट्टू बना दे॥ 7738॥
7कोउ कह चाल देखो गोविंद राधे।
8गज हंस दोनों की नाक कटा दे॥ 7739॥
9कोउ कह चितवनि गोविंद राधे।
10जो भी लखे लखता रह जाये बता दे॥ 7740॥
11कोउ कह अरी सखी गोविंद राधे।
12यह हम सबका है प्राण बता दे॥ 7741॥
13यह सब निज गुन गोविंद राधे।
14लाला सुन चोरी चोरी बता दे॥ 7742॥
15लाला ते रहा न गया गोविंद राधे।
16आँखि खोलि देखा गोपियों को बता दे॥ 7743॥
17सब गोपियों ने किया गोविंद राधे।
18दर्शन मगन मन सुधि बिसरा दे॥ 7744॥
19निज प्रतिबिम्ब लखि गोविंद राधे।
20हरि कह मैया आजा चोर दिखा दे॥ 7745॥
21एक दिन घर हरि गोविंद राधे।
22नवनीत चौर कर्म किये थे बता दे॥ 7746॥
23इतने में देखा हरि गोविंद राधे।
24मणिखम्भ निज प्रतिबिम्ब बता दे॥ 7747॥