Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 663
Reading 161 of 452 · Source nos. 7664–7675 · Source PDF 166
1मैया ने लिया नाहिं गोविंद राधे।
2कहा जावो बाहर खेलो बता दे॥ 7664॥
3इतने में आये तहँ गोविंद राधे।
4नारद ब्रह्मर्षि बोले बता दे॥ 7665॥
5जाकी कृपा को माँगें गोविंद राधे।
6विधि हरि हर धरि ध्यान बता दे॥ 7666॥
7सोइ ब्रह्म कृष्ण तेरी गोविंद राधे।
8गोद हित रोये लोटे भू पै बता दे॥ 7667॥
9वेद में ऐसा कौन गोविंद राधे।
10कर्म है जाको यह फल है बता दे॥ 7668॥
11ले ले ले ले ले ले गोविंद राधे।
12गोद में ले ले है प्रार्थना बता दे॥ 7669॥
13एक दिन पूर्णिमा थी गोविंद राधे।
14चाँदनी थी आँगन छिटकी बता दे॥ 7670॥
15मैया यशोदा सँग गोविंद राधे।
16थी गोपियों की गोष्ठी बता दे॥ 7671॥
17खेलते खेलते ही गोविंद राधे।
18लाला की दृष्टि पड़ी चन्द्र पै बता दे॥ 7672॥
19लाल गये मैया के गोविंद राधे।
20पाछे लगे चोटी खींचने बता दे॥ 7673॥
21पीठ में धीरे धीरे गोविंद राधे।
22लाला लगे थपथपाने बता दे॥ 7674॥
23तोतरी बोली में गोविंद राधे।
24मैं लूँगा लगे बोलने बता दे॥ 7675॥