Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 660
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1तृणावर्त मर कर गोविंद राधे।
2लाला के घर गिरा भू पै बता दे॥ 7628॥
3तृणावर्त असुर की गोविंद राधे।
4पूर्व कहानी है ऐसी बता दे॥ 7629॥
5पांडु देश राजा थे गोविंद राधे।
6नाम था सहस्राक्ष उनका बता दे॥ 7630॥
7नर्मदा के तट पै गोविंद राधे।
8साथ थीं उनकी रानियाँ बता दे॥ 7631॥
9उन रानियों के संग गोविंद राधे।
10कर रहे थे राजा क्रीड़ा बता दे॥ 7632॥
11औचक आये तहँ गोविंद राधे।
12मुनि दुर्वासा तपस्वी बता दे॥ 7633॥
13राजा ने देखा किन्तु गोविंद राधे।
14किया ना प्रणाम उन मुनि को बता दे॥ 7634॥
15दुर्वासा ने तब गोविंद राधे।
16दण्ड स्वरूप दिया शाप बता दे॥ 7635॥
17जा जा राजा तू गोविंद राधे।
18हो जा राक्षस भू पै बता दे॥ 7636॥
19राजा गिड़गिड़ाया गोविंद राधे।
20तब आई दया उन मुनि को बता दे॥ 7637॥
21कहा दुर्वासा ने गोविंद राधे।
22कृष्ण तनु स्पर्श करि मुक्त हो बता दे॥ 7638॥
23वही तृणावर्त आजु गोविंद राधे।
24मुक्त हुआ कृष्ण के स्पर्श ते बता दे॥ 7639॥