Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 659
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1पुनि तृणावर्त ने गोविंद राधे।
2लाला को उड़ाया गया नभ में बता दे॥ 7616॥
3मैया ने देखा तहाँ गोविंद राधे।
4जहाँ बैठाया था लाला को बता दे॥ 7617॥
5लाला नहीं थे तहाँ गोविंद राधे।
6यह जानि घबराई मैया बता दे॥ 7618॥
7लाला को न पाके मैया गोविंद राधे।
8गिरि गइ मूर्छित छिति पै बता दे॥ 7619॥
9मिटा जब बवंडर गोविंद राधे।
10मैया का रोना सुना और ने बता दे॥ 7620॥
11सब आईं मैया ढिग गोविंद राधे।
12मैया के साथ लगीं रोने बता दे॥ 7621॥
13उधर तृणावर्त गोविंद राधे।
14लाला को जो ले गया था बता दे॥ 7622॥
15लाला के भार को गोविंद राधे।
16सहि नहिं सका वह असुर बता दे॥ 7623॥
17तृणावर्त सोचे मन गोविंद राधे।
18लाला तो भारी है गिरि ते बता दे॥ 7624॥
19तब लाला ने भी गोविंद राधे।
20गला पकड़ा तृणावर्त का बता दे॥ 7625॥
21लाला ने दबाया गला गोविंद राधे।
22तृणावर्त हुआ निश्चेष्ट बता दे॥ 7626॥
23बोलना बन्द हुआ गोविंद राधे।
24आँखें निकल आईं बाहर बता दे॥ 7627॥