Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 658
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1एक दिन लाला को गोविंद राधे।
2मैया ने लिया निज गोद बता दे॥ 7604॥
3हलराया दुलराया गोविंद राधे।
4चिपटाया अरु मुख चूमा बता दे॥ 7605॥
5इतने में श्रीकृष्ण गोविंद राधे।
6चट्टान सम भये भारी बता दे॥ 7606॥
7लाला का भार बढ़ा गोविंद राधे।
8मैया नाहीं सहि सकी थी बता दे॥ 7607॥
9मैया ने लाला को गोविंद राधे।
10भूमि पै बैठा दिया था बता दे॥ 7608॥
11मैया चकित हो गोविंद राधे।
12किया नारायण स्मरण बता दे॥ 7609॥
13पुनि मैया घर के गोविंद राधे।
14काम काज को चली गई थी बता दे॥ 7610॥
15तृणावर्त राक्षस गोविंद राधे।
16कंस का था निजी दास बता दे॥ 7611॥
17कंस की आज्ञा ते गोविंद राधे।
18बनि के बवंडर आया था बता दे॥ 7612॥
19उसने ब्रजरज ते गोविंद राधे।
20गोकुल गाँव को ढक दिया बता दे॥ 7613॥
21असुर निनाद ते तो गोविंद राधे।
22दसहूँ दिशा गईं काँप बता दे॥ 7614॥
23सारा ब्रज दो घड़ी गोविंद राधे।
24रज अरु तम ते ढक गया बता दे॥ 7615॥