Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 657
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1बार बार क्षमा माँगी गोविंद राधे।
2लोमश को आई करु णा बता दे॥ 7592॥
3लोमश बोले तेरा गोविंद राधे।
4उद्घार होगा कृष्ण पग ते बता दे॥ 7593॥
5वही असुर उत्कच गोविंद राधे।
6निराकार छकड़े में बैठा बता दे॥ 7594॥
7नन्हें से लाला के गोविंद राधे।
8नन्हें पग ते ध्वस्त छकड़ा बता दे॥ 7595॥
9सब गोप गोपियाँ गोविंद राधे।
10अति अचरज में डूबीं बता दे॥ 7596॥
11खेलते ग्वालों ने गोविंद राधे।
12कहा करतूत यह कान्ह की बता दे॥ 7597॥
13किन्तु वृद्ध गोपों ने गोविंद राधे।
14बाल बुद्धि जानि नाहीं माना बता दे॥ 7598॥
15मैया ने सोचा यह गोविंद राधे।
16कोइ उत्पात है ग्रह का बता दे॥ 7599॥
17रोते हुए लाला को गोविंद राधे।
18मैया ने उठाया निज गोद में बता दे॥ 7600॥
19वेद मंत्रों के द्वारा गोविंद राधे।
20शान्ति का पाठ करवाया बता दे॥ 7601॥
21पुनि लै मैया ने गोविंद राधे।
22लाला को पिलाया निज दूध बता दे॥ 7602॥
23अक्षत दधि कुश गोविंद राधे।
24जल ते पूजा छकड़े को बता दे॥ 7603॥