Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 656
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1पाँव उछालने ते गोविंद राधे।
2छू गया पाँव छकड़े ते बता दे॥ 7580॥
3पाँव के छूते ही गोविंद राधे।
4बड़ा छकड़ा गया उलट बता दे॥ 7581॥
5छकड़े का प्रतिभाग गोविंद राधे।
6छिन्न भिन्न अरु ध्वस्त हो गया बता दे॥ 7582॥
7छकड़े में बैठा था गोविंद राधे।
8शकटासुर बलशाली बता दे॥ 7583॥
9शकटासुर की तो गोविंद राधे।
10बड़ी रोचक है कहानी बता दे॥ 7584॥
11हिरण्याक्ष का पुत्र गोविंद राधे।
12नाम था जिसका उत्कच बता दे॥ 7585॥
13उत्कच बलशाली गोविंद राधे।
14बड़ा ही मोटा तगड़ा बता दे॥ 7586॥
15एक बार जाते जाते गोविंद राधे।
16लोमश आश्रम पहुँचा बता दे॥ 7587॥
17आश्रम वृक्षों को गोविंद राधे।
18निज तनु ते डाला कुचल बता दे॥ 7588॥
19लोमश ने दण्डरूप गोविंद राधे।
20शाप दे दिया उत्कच को बता दे॥ 7589॥
21देह का गर्व तुझे गोविंद राधे।
22याते तू हो निराकार बता दे॥ 7590॥
23उत्कच घबराया गोविंद राधे।
24लोमश पग रोया धोया बता दे॥ 7591॥