Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 654
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1पुनि ब्रजवासियों ने गोविंद राधे।
2पूतना का अंग काटा बता दे॥ 7556॥
3दूर ले जा के तनु गोविंद राधे।
4आग में जलाया पूतना का बता दे॥ 7557॥
5जल रहे तनु के गोविंद राधे।
6धुयें ते निकली सुगंध बता दे॥ 7558॥
7अचरज राक्षसी को गोविंद राधे।
8कृष्ण ने दिया गोलोक बता दे॥ 7559॥
9पूतना को दिये निज गोविंद राधे।
10धाम ब्रह्मा पूछे अब मैया को का दे॥ 7560॥
11मैया के ऋण ते तो गोविंद राधे।
12कोई उऋण हुआ था क्या बता दे॥ 7561॥
13एक बार लाला के गोविंद राधे।
14करवट बदलने का पर्व था बता दे॥ 7562॥
15उसी दिन लाला का गोविंद राधे।
16अभिषेक भी होना था बता दे॥ 7563॥
17उसी दिन लाला का गोविंद राधे।
18जन्म का उत्सव भी था बता दे॥ 7564॥
19अतएव घर में थी गोविंद राधे।
20भीड़ अधिक गोपियों की बता दे॥ 7565॥
21कोइ गावे कोई नाचे गोविंद राधे।
22कोइ दुलरावे नन्दलाल को बता दे॥ 7566॥
23उसी समय मैया ने गोविंद राधे।
24किया अभिषेक लाला का बता दे॥ 7567॥