Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 653
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1पूतना चिल्लायी कहि गोविंद राधे।
2छोड़ दे छोड़ दे मरी मैं बता दे॥ 7544॥
3पूतना ने बार बार गोविंद राधे।
4कर पद पटके नेत्र उलटे बता दे॥ 7545॥
5पूतना की कुच पीड़ा गोविंद राधे।
6इतनी कि वह सह सकी ना बता दे॥ 7546॥
7पुनि राक्षसी रूप गोविंद राधे।
8प्रकट किया पूतना ने बता दे॥ 7547॥
9पूतना राक्षसी का गोविंद राधे।
10देह था विराट छे कोस का बता दे॥ 7548॥
11मर कर गिरी जब गोविंद राधे।
12छे कोस के वृक्ष कुचले बता दे॥ 7549॥
13मरे हुये तनु को गोविंद राधे।
14लखि ब्रजवासी सब डरे थे बता दे॥ 7550॥
15उधर बालकृष्ण ने भी गोविंद राधे।
16कुच नाहिं छोड़ा रहे खेलते बता दे॥ 7551॥
17पूतना के वक्ष पै गोविंद राधे।
18बालकृष्ण खेलें अरु सोचें बता दे॥ 7552॥
19मैं तो दूधमुँह शिशु गोविंद राधे।
20स्तन पीना ही जीविका है बता दे॥ 7553॥
21तूने मम मुख कुच गोविंद राधे।
22डाला याते मैंने पिया है बता दे॥ 7554॥
23मेरे स्तन पीने ते गोविंद राधे।
24तू जो मरे मेरा दोष क्या बता दे॥ 7555॥