Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 652
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1बलि यज्ञशाला में गोविंद राधे।
2भगवान वामन आये बता दे॥ 7532॥
3तेहि लखि रत्नमाला गोविंद राधे।
4उर आया पुत्र स्नेह बता दे॥ 7533॥
5कन्या ने वर माँगा गोविंद राधे।
6वामन ने वर दिया भी बता दे॥ 7534॥
7द्वापर में रत्नमाला गोविंद राधे।
8पूतना बनि आई ब्रज में बता दे॥ 7535॥
9“पूतान्नयति इति” गोविंद राधे।
10पावन शिशु मारे पूतना बता दे॥ 7536॥
11एक दिन पूतना गोविंद राधे।
12सुंदरी बनि गयी गोकुल बता दे॥ 7537॥
13तहाँ गई नन्द घर गोविंद राधे।
14देखा श्याम सोये हैं पलने बता दे॥ 7538॥
15रोहिणी यशोदा दोनों गोविंद राधे।
16सुन्दरी में मुग्ध कछु बोलीं ना बता दे॥ 7539॥
17पुनि उस पूतना ने गोविंद राधे।
18गोद में उठाया बाल कृष्ण बता दे॥ 7540॥
19पुनि विष लगे हुए गोविंद राधे।
20कुच को डाला हरि मुख में बता दे॥ 7541॥
21श्याम नेत्र बन्द करि गोविंद राधे।
22क्रोध को बुलाया निज पास बता दे॥ 7542॥
23श्याम पियें कुच अरु गोविंद राधे।
24क्रोध पिये पूतना का प्राण बता दे॥ 7543॥