Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 651
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1नन्हें मुन्नें बाल कृष्ण गोविंद राधे।
2मैया लिये थी उन्हें गोद में बता दे॥ 7520॥
3देर तक मैया का गोविंद राधे।
4दूध पीते रहे लाला बता दे॥ 7521॥
5मैया ने सोचा लाला गोविंद राधे।
6अधिक पी ले तो हो अपच बता दे॥ 7522॥
7यदि औचक मुख गोविंद राधे।
8स्तन ते हटा दे तो रोये बता दे॥ 7523॥
9यह सोचि मैया ने गोविंद राधे।
10लाला मुखारविन्द चूमा बता दे॥ 7524॥
11लाला ने देखा मैया गोविंद राधे।
12मैया ने भी चिपटाया बता दे॥ 7525॥
13इतने में आई तहँ गोविंद राधे।
14लाला को जँभुआई मैया सुला दे॥ 7526॥
15नाम ते पूतना थी गोविंद राधे।
16जाति ते थी राक्षसी भी बता दे॥ 7527॥
17व्यवसाय उसका था गोविंद राधे।
18नवजात शिशुओं को खाना बता दे॥ 7528॥
19जीविका भी उसकी थी गोविंद राधे।
20लघु शिशुओं का रक्त पीना बता दे॥ 7529॥
21फिर भी वह पायी गति गोविंद राधे।
22धन्य कृष्ण धन्य कृष्ण कृपा को बता दे॥ 7530॥
23एक थे राजा बलि गोविंद राधे।
24उनकी थी कन्या रत्नमाला बता दे॥ 7531॥