Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 648
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1कछु काल बाद नंद गोविंद राधे।
2कंस कर चुकाने गये मथुरा बता दे॥ 7484॥
3कंस कर चुका के नन्द गोविंद राधे।
4लौटे तब आये वसुदेव बता दे॥ 7485॥
5वसुदेव जी को लखि गोविंद राधे।
6नन्द उठे मिले बड़े प्यार ते बता दे॥ 7486॥
7उर ते लगा के नन्द गोविंद राधे।
8प्रेम में हो गये प्रमत्त बता दे॥ 7487॥
9नन्द बाबा ने किया गोविंद राधे।
10वसुदेव का सत्कार बता दे॥ 7488॥
11वसुदेव बोले नन्द गोविंद राधे।
12हो गये अब तुम वृद्ध बता दे॥ 7489॥
13बड़ा सौभाग्य है जो गोविंद राधे।
14तुम को हुई पुत्रप्राप्ति बता दे॥ 7490॥
15तुम जहाँ रहते हो गोविंद राधे।
16वहाँ सब सुविधायें होंगी बता दे॥ 7491॥
17जल घास लता पता गोविंद राधे।
18वहाँ सब कछु तो होगा बता दे॥ 7492॥
19मेरा पुत्र राम तहँ गोविंद राधे।
20सुखपूर्वक तो होगा बता दे॥ 7493॥
21अस्तु अब नन्द तुम गोविंद राधे।
22बेर न करो जाओ ब्रज में बता दे॥ 7494॥
23छे दिन के थे कृष्ण गोविंद राधे।
24पूतना का वध किया सबको बता दे॥ 7495॥