Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 647
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1मतवाले ग्वाले भी गोविंद राधे।
2एक दूजे पै दूध दही लुढ़का दे॥ 7472॥
3माखन लोंदा लै लै गोविंद राधे।
4एक दूसरे पै फेंके बता दे॥ 7473॥
5भगवान श्रीकृष्ण गोविंद राधे।
6सारे जगत के स्वामी बता दे॥ 7474॥
7ऐश्वर्य माधुर्य गोविंद राधे।
8सब है अनन्त श्रीकृष्ण का बता दे॥ 7475॥
9सब को ही मुँहमाँगी गोविंद राधे।
10वस्तु दी नन्द बाबा ने बता दे॥ 7476॥
11इन सब कर्मों का गोविंद राधे।
12उद्देश्य था विष्णु प्रीति बता दे॥ 7477॥
13विष्णु प्रीति तात्पर्य गोविंद राधे।
14मेरे लाल का मंगल हो बता दे॥ 7478॥
15रोहिणी भी सजधज गोविंद राधे।
16करें गोपियों का स्वागत बता दे॥ 7479॥
17नन्द का स्वभाव अति गोविंद राधे।
18दानशील पर उपकारी बता दे॥ 7480॥
19जो भी आया नन्द घर गोविंद राधे।
20सब को दिया उपहार बता दे॥ 7481॥
21चोरी चोरी यह दृश्य गोविंद राधे।
22देखें विधि हरि हर सुर भी बता दे॥ 7482॥
23स्वर्ग अप्सरायें भी गोविंद राधे।
24हर्ष ते नाचें विमान में बता दे॥ 7483॥