Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 645
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1आपका दर्शन गोविंद राधे।
2आपकी कृपा ते ही होय बता दे॥ 7448॥
3देवकी माता जू गोविंद राधे।
4आप हो सौभाग्यशालिनी बता दे॥ 7449॥
5आप की कोख में गोविंद राधे।
6आये स्वयं भगवान बता दे॥ 7450॥
7नन्द के आनन्द गोविंद राधे।
8प्रकटे आनन्दकन्द बता दे॥ 7451॥
9पुत्र जन्म सुनि नन्द गोविंद राधे।
10रोम रोम आनन्दमग्न बता दे॥ 7452॥
11नन्द ने स्नान किया गोविंद राधे।
12सुंदर वस्त्र आदि पहिरे बता दे॥ 7453॥
13नन्द ने बुलवाया गोविंद राधे।
14वेदज्ञ विप्रवर गर्ग बता दे॥ 7454॥
15गर्ग कहें श्याम लखि गोविंद राधे।
16मेरा तो जन्म हुआ सफल बता दे॥ 7455॥
17पुनि स्वस्तिवाचन गोविंद राधे।
18किया जातकर्म संस्कार बता दे॥ 7456॥
19सजी धजी दो लाख गोविंद राधे।
20गायें भी दीं ब्राह्मणों को बता दे॥ 7457॥
21पुनि देवताओं की गोविंद राधे।
22करवायी पूजा सविधि बता दे॥ 7458॥
23रत्न वस्त्र आवृत गोविंद राधे।
24सात पहाड़ दिये तिल के बता दे॥ 7459॥