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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

लीला माधुरी · पृष्ठ 644

Reading 142 of 452 · Source nos. 7436–7447 · Source PDF 147

1पुनि मायानिवृत्ति गोविंद राधे।

2उनकी कैसे होगी बता दे॥ 7436॥

3ऐसे ज्ञानियों का गोविंद राधे।

4पतन होना है निश्चित बता दे॥ 7437॥

5आप भक्तों का तो गोविंद राधे।

6योगक्षेम वहन करें आपु बता दे॥ 7438॥

7अतएव भक्तों का गोविंद राधे।

8पतन न होता कभू स्वप्न में बता दे॥ 7439॥

9मायाबद्ध हित गोविंद राधे।

10आप सत्वमय तनु धारें बता दे॥ 7440॥

11दिव्य सत्व तनु ते ही गोविंद राधे।

12आपका अपरोक्ष ज्ञान हो बता दे॥ 7441॥

13वेदों के द्वारा तो गोविंद राधे।

14आपका हो परोक्ष ज्ञान बता दे॥ 7442॥

15आपका दिव्य रूप गोविंद राधे।

16नाम गुण लीला गान आप ते मिला दे॥ 7443॥

17फिर तो सब पाँचों मुक्ति गोविंद राधे।

18भक्त की दासी चह बनना बता दे॥ 7444॥

19आपका दिव्य देह गोविंद राधे।

20धारण तो है विनोद बता दे॥ 7445॥

21आपने अनन्त बार गोविंद राधे।

22पृथ्वी का भार उतारा बता दे॥ 7446॥

23इस बार प्रेमरस गोविंद राधे।

24सक्त विरक्त भक्त सबको पिला दे॥ 7447॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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