लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content
Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

लीला माधुरी · पृष्ठ 641

Reading 139 of 452 · Source nos. 7400–7411 · Source PDF 144

1सृष्टि के काल भी गोविंद राधे।

2आप रहें नित्य ही सत्य बता दे॥ 7400॥

3पंच महाभूतों के गोविंद राधे।

4आप ही कारणरूप हैं बता दे॥ 7401॥

5आप ही जग में गोविंद राधे।

6व्यापक अन्तर्यामी बता दे॥ 7402॥

7दृश्यमान जग के गोविंद राधे।

8आप परमार्थ रूप सत्य हैं बता दे॥ 7403॥

9आप तो श्रीकृष्ण गोविंद राधे।

10सत्य स्वरूप हैं त्रिकाल में बता दे॥ 7404॥

11आप ही हैं शरण्य गोविंद राधे।

12हम सब शरणागत हैं बता दे॥ 7405॥

13यह संसार वृक्ष गोविंद राधे।

14वृक्ष का आश्रय प्रकृति बता दे॥ 7406॥

15इसके फल दो गोविंद राधे।

16एक सुख एक है दुःख बता दे॥ 7407॥

17इसकी जड़ें तीन गोविंद राधे।

18सत्व अरु रज अरु तम हैं बता दे॥ 7408॥

19इसके रस चार गोविंद राधे।

20धर्म, अर्थ, काम अरु मोक्ष बता दे॥ 7409॥

21ज्ञेय प्रकार पाँच गोविंद राधे।

22कान, त्वक्, नेत्र, नासा, रसना बता दे॥ 7410॥

23इसके स्वभाव छे गोविंद राधे।

24पैदा होना रहना बता दे॥ 7411॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

Source edition and PDF · Text version