Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 637
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1सारा जग हरि का है गोविंद राधे।
2हरि कछु ले तो जग चौर बता दे॥ 7352॥
3राधे जानें गोविंद गोविंद राधे।
4और कोई जाने जब दोनों जना दें॥ 7353॥
5लै लै अवतार किया गोविंद राधे।
6ऐसी लीलाएं विधि बुधि भरमा दे॥ 7354॥
7बुद्धि ते परे हैं दोनों गोविंद राधे।
8बुद्धि ना लगावो माँगो रो के कृपा दे॥ 7355॥
9मथुरा में देवमीढ़ गोविंद राधे।
10वृष्णि वंश भूषण नृप थे बता दे॥ 7356॥
11उनकी थीं दो रानी गोविंद राधे।
12वैश्य अरु क्षत्रिय कन्या बता दे॥ 7357॥
13क्षत्रिय कन्या ते गोविंद राधे।
14शूर शूर ते वसुदेव बता दे॥ 7358॥
15वैश्य क न्या ते तो गोविंद राधे।
16हुए पर्जन्य वर्ण वैश्य बता दे॥ 7359॥
17गोपालन कर्म गोविंद राधे।
18पर्जन्य ने अपनाया बता दे॥ 7360॥
19पर्जन्य वैश्य में भी गोविंद राधे।
20आभीर वंश था उनका बता दे॥ 7361॥
21पर्जन्य के पाँच पुत्र गोविंद राधे।
22नंद अरु उपनंद आदि थे बता दे॥ 7362॥
23नंद को राज्य दिया गोविंद राधे।
24चार को नंद का मंत्री बना दे॥ 7363॥