Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 635
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1मीन ज्योँ क्षीरसिन्धु गोविंद राधे।
2नैन मूँदि केवल पय पिये बता दे॥ 7328॥
3ऐसे ही कृष्ण भक्त गोविंद राधे।
4सुने कृष्ण कथा एकाग्र बता दे॥ 7329॥
5उपर्युक्त चारों को गोविंद राधे।
6शास्त्र कहे प्रवर श्रोता बता दे॥ 7330॥
7अवर का प्रकार तीन गोविंद राधे।
8भेड़िया, बैल अरु ऊँट बता दे॥ 7331॥
9वृक ज्योँ हिरन को गोविंद राधे।
10गायन सुनत गर्जन ते डरा दे॥ 7332॥
11ऐसे ही हरिकथा गोविंद राधे।
12श्रोता को खल भी दुख पहुँचा दे॥ 7333॥
13वृष ज्योँ अंगूर गोविंद राधे।
14या निम्बखली दोनों खाय बता दे॥ 7334॥
15ऐसे ही सारासार गोविंद राधे।
16सोचे बिनु खल सुने प्रवचन बता दे॥ 7335॥
17ऊँट ज्योँ आम्र फल गोविंद राधे।
18खाये न निंब पत्र खाये बता दे॥ 7336॥
19ऐसे ही कृष्ण कथा गोविंद राधे।
20सुने नहिं सुने ग्राम्य कथा ही बता दे॥ 7337॥
21लीला पुरुषोत्तम गोविंद राधे।
22नित नव लीला करें कृष्ण बता दे॥ 7338॥
23पूर्व श्रीकृष्ण ने तो गोविंद राधे।
24मर्यादातीत लीला की बता दे॥ 7339॥