Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 634
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1सच्चा वह श्रोता जो गोविंद राधे।
2जितना पिये प्यास उतनी बढ़ा दे॥ 7316॥
3सच्चा वह वक्ता जो गोविंद राधे।
4सच्चा हो लीला कथा रसिक बता दे॥ 7317॥
5हरि कथा वाचक दो गोविंद राधे।
6स्वार्थी और परार्थी बता दे॥ 7318॥
7श्रोता का प्रकार दो है गोविंद राधे।
8एक वर एक अवर बता दे॥ 7319॥
9वर का प्रकार चार गोविंद राधे।
10चातक हंस शुक मीन बता दे॥ 7320॥
11चातक ज्योँ स्वाती जल गोविंद राधे।
12ते ही करे प्यार अनन्य बता दे॥ 7321॥
13ऐसे ही कृष्ण भक्त गोविंद राधे।
14सुने हरि हरिजन चर्चा बता दे॥ 7322॥
15हंस ज्योँ मिश्रित गोविंद राधे।
16दूध जल में ते पिये दूध ही बता दे॥ 7323॥
17ऐसे ही कृष्णभक्त गोविंद राधे।
18सुने चाहे जो माने भक्ति ही बता दे॥ 7324॥
19शुक ज्योँ सुने जो भी गोविंद राधे।
20ज्योँ का त्योँ सबको ही सुना दे॥ 7325॥
21ऐसे ही कृष्ण भक्त गोविंद राधे।
22गुरु उपदेश ज्योँ का त्योँ ही सुना दे॥ 7326॥
23शुक के समान बोले गोविंद राधे।
24बक के समान करे ध्यान बता दे॥ 7327॥