Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
अवतार · पृष्ठ 630
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1जादू भरे कृष्ण नैन गोविंद राधे।
2देखते ही गिरे परमहंस बता दे॥ 7282॥
3लखि कृष्ण मुख शोभा गोविंद राधे।
4मँडराने लगे भौंर कर ते हटा दे॥ 7283॥
5घुँघराले बाल ऐसे गोविंद राधे।
6जैसे कोउ भ्रमरन पंक्ति बना दे॥ 7284॥
7मतवाली चाल ऐसी गोविंद राधे।
8लखि वन भाजि गये गज मद माते॥ 7285॥
9कृष्ण के भूषण वस्त्र गोविंद राधे।
10सब ही हैं दिव्य चिदानंद बता दे॥ 7286॥
11कृष्ण का है सौन्दर्य गोविंद राधे।
12कोटि कोटि कमनीय काम को बता दे॥ 7287॥
13कृष्ण रोम रोम पै गोविंद राधे।
14कोटि कोटि काम निछावर करा दे॥ 7288॥
15कृष्ण सौन्दर्य लखि गोविंद राधे।
16कामदेव हुआ था मुग्ध बता दे॥ 7289॥
17काम ने वर माँगा गोविंद राधे।
18गोपी बनि करुँ हरि सेवा बता दे॥ 7290॥
19कोटि कोटि ब्रह्म सुख गोविंद राधे।
20श्याम तनु सौन्दर्य सुख पै लुटा दे॥ 7291॥
21लखि श्याम सौन्दर्य गोविंद राधे।
22सनक समाधि सनक बिसरा दे॥ 7292॥
23श्याम रूप गुण ऐसा गोविंद राधे।
24ब्रह्मलीन शुक भी समाधि भुला दे॥ 7293॥