Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
अवतार · पृष्ठ 631
Reading 129 of 452 · Source nos. 7294–7305 · Source PDF 134
1श्याम रूप लावण्य गोविंद राधे।
2भगवान शिव को शिवानी बना दे॥ 7294॥
3श्याम रूप माधुर्य गोविंद राधे।
4उमा रमा का भी पातिव्रत्य नसा दे॥ 7295॥
5हरि का सौन्दर्य गोविंद राधे।
6प्रतिक्षण वर्धमान ही है बता दे॥ 7296॥
7सौंदर्य माधुर्य गोविंद राधे।
8चिदानंदमय हैं कृष्ण के बता दे॥ 7297॥
9प्राकृत इन्द्रिय गोविंद राधे।
10अग्राह्य कृष्ण तनु दिव्य बता दे॥ 7298॥
11हरि विरहाग्नि ते तो गोविंद राधे।
12रसमय तनु बने दिव्य बता दे॥ 7299॥
13तब दिव्य तन मन गोविंद राधे।
14दिव्य तन वारे कृष्ण ते मिला दे॥ 7300॥
15ब्रह्मा ने तप किया गोविंद राधे।
16एक सहस्र दिव्य वर्ष बता दे॥ 7301॥
17फिर भी न अन्त पाया गोविंद राधे।
18अनन्त भगवान कृष्ण का बता दे॥ 7302॥
19श्रीकृष्ण कैसे हैं गोविंद राधे।
20वेद भी “अनिर्वचनीय हैं” बता दे॥ 7303॥
21श्रीकृष्ण कैसे हैं गोविंद राधे।
22कृष्ण भी नाहिं बता सकते बता दे॥ 7304॥
23हरि है अनंत किन्तु गोविंद राधे।
24अपना न अंत पावे वेद बता दे॥ 7305॥