Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
अवतार · पृष्ठ 626
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1लख चौरासी तनु गोविंद राधे।
2कारण देह ते ही प्राप्त हों बता दे॥ 7234॥
3जब लौं रह पूर्व कर्म गोविंद राधे।
4तब लौं नहिं मुक्त होय जीव बता दे॥ 7235॥
5कर्म बन्धन ते ही गोविंद राधे।
6पुनि पुनि मिले तनु भौतिक बता दे॥ 7236॥
7पंचभूत स्थूल तनु गोविंद राधे।
8रक्त मांस अस्थि का है टोकरा बता दे॥ 7237॥
9नर नारी योग ते ही गोविंद राधे।
10बने प्रायः तनु प्राकृत बता दे॥ 7238॥
11कामजन्य तनु हो या गोविंद राधे।
12उर्ध्वरेता संकल्पज बता दे॥ 7239॥
13दृष्टि मात्र ते हो या गोविंद राधे।
14बिना दृष्टि के ही देह हो बता दे॥ 7240॥
15मैथुनी अमैथुनी गोविंद राधे।
16सभी देह हैं प्राकृत ही बता दे॥ 7241॥
17योग निर्माण काय गोविंद राधे।
18शुद्ध है किन्तु है प्राकृत बता दे॥ 7242॥
19देवों का दिव्य देह गोविंद राधे।
20रक्त मांस अस्थि आदि रहित बता दे॥ 7243॥
21किन्तु देव देह भी गोविंद राधे।
22प्राकृत देह है देवों ते बता दे॥ 7244॥
23श्रीकृष्ण देह तो है गोविंद राधे।
24सच्चिदानन्द स्वरूप बता दे॥ 7245॥