Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
अवतार · पृष्ठ 625
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1वैकुण्ठ अधिपति गोविंद राधे।
2महाविष्णु अवतार हो ना बता दे॥ 7222॥
3नारायण धाम गोविंद राधे।
4ब्रज रसिकों को नहिं भाये बता दे॥ 7223॥
5श्रीकृष्ण महाविष्णु गोविंद राधे।
6दोनों रूप ऐश्वर्य सम है बता दे॥ 7224॥
7माधुर्य में तो कृष्ण गोविंद राधे।
8महाविष्णु ते कोटि गुना हैं बता दे॥ 7225॥
9नारायण ते मधुर गोविंद राधे।
10द्वारिकाधीश श्रीकृष्ण बता दे॥ 7226॥
11द्वारिकाधीश ते भी गोविंद राधे।
12मधुर हैं मथुराधीश बता दे॥ 7227॥
13सब ते मधुरतम गोविंद राधे।
14वृन्दावन बिहारी हैं सब को बता दे॥ 7228॥
15वृन्दावन में ही गोविंद राधे।
16कृष्ण लीला पूर्णतम विकास बता दे॥ 7229॥
17स्थूल सूक्ष्म कारण गोविंद राधे।
18तीन देह योग देह प्राकृत बता दे॥ 7230॥
19जब लौं रह कारण तनु गोविंद राधे।
20तब लौं रह देह भी प्राकृत बता दे॥ 7231॥
21पूर्वकृत कर्मों के गोविंद राधे।
22संस्कार कारण देह है बता दे॥ 7232॥
23इसी आधार पै गोविंद राधे।
24जीव का बार बार जन्म हो बता दे॥ 7233॥