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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

अवतार · पृष्ठ 618

Reading 116 of 452 · Source nos. 7138–7149 · Source PDF 121

1जीव चराचर सब गोविंद राधे।

2जीव शक्ति की परिणिति हैं बता दे॥ 7138॥

3अगणित ब्रह्माण्ड गोविंद राधे।

4माया शक्ति की परिणिति बता दे॥ 7139॥

5सत् चित् आनन्द गोविंद राधे।

6ब्रह्म श्रीकृष्ण का स्वरूप बता दे॥ 7140॥

7कृष्ण चित् शक्ति की गोविंद राधे।

8वृत्ति विशेष योगमाया बता दे॥ 7141॥

9योगमाया चित् शक्ति गोविंद राधे।

10विशुद्ध सत्व की परिणिति बता दे॥ 7142॥

11जो है शुद्ध सत् गोविंद राधे।

12पृथक पृथक हो के एक है बता दे॥ 7143॥

13जो है शुद्ध सत् गोविंद राधे।

14वही शुद्ध सत् शुद्ध चित् है बता दे॥ 7144॥

15जिसकी भी हो सत्ता गोविंद राधे।

16उसका अवश्य हो भान बता दे॥ 7145॥

17ऐसे ही शुद्ध चित् गोविंद राधे।

18निश्चित ही शुद्ध सत् भी है बता दे॥ 7146॥

19जिसका हो भान गोविंद राधे।

20उसकी अवश्य हो सत्ता बता दे॥ 7147॥

21सत् चित् दोनों ही गोविंद राधे।

22जगत प्रपंच का कारण बता दे॥ 7148॥

23सत् चित् की भाँति गोविंद राधे।

24आनन्द भी जग कारण बता दे॥ 7149॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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