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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

अवतार · पृष्ठ 617

Reading 115 of 452 · Source nos. 7126–7137 · Source PDF 120

1योगमाया दिव्य शक्ति गोविंद राधे।

2माया जड़ हरि आधीन बता दे॥ 7126॥

3योगमाया शक्ति ऐसी गोविंद राधे।

4दो विरोधी कर्म हरि गुरु ते करा दे॥ 7127॥

5योगमाया परा शक्ति गोविंद राधे।

6अघटित घटना पटीयसी बता दे॥ 7128॥

7यह योगमाया शक्ति गोविंद राधे।

8कृष्ण भक्त कृष्ण को मुग्ध करा दे॥ 7129॥

9“मीयतेऽनया माया” गोविंद राधे।

10जाते ब्रह्म ज्ञेय हो माया बता दे॥ 7130॥

11माया शक्ति दो हैं गोविंद राधे।

12जड़माया अरु योगमाया बता दे॥ 7131॥

13एक माया अंतरंगा गोविंद राधे।

14एक माया जड़ बहिरंगा बता दे॥ 7132॥

15प्रकाश अंधकार गोविंद राधे।

16सूर्य की विरोधी हैं शक्तियाँ बता दे॥ 7133॥

17ऐसे ही कृष्ण की भी गोविंद राधे।

18अंतरंगा बहिरंगा माया बता दे॥ 7134॥

19सूर्य के समक्ष तम गोविंद राधे।

20आ नहीं सकता त्रिकाल में बता दे॥ 7135॥

21ऐसे ही हरि आगे गोविंद राधे।

22बहिरंगा माया भी जाय ना बता दे॥ 7136॥

23गोलोक धाम आदि गोविंद राधे।

24स्वरूप शक्ति की परिणिति बता दे॥ 7137॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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