Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
अवतार · पृष्ठ 616
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1निज छाया लखि गोविंद राधे।
2हरि मोहित राधारानी मुसका दे॥ 7114॥
3अपनी ही महिमा ते गोविंद राधे।
4महिमान्वित हैं कृष्ण बता दे॥ 7115॥
5अपने प्रकाश ते ही गोविंद राधे।
6आपु हैं प्रकाशित कृष्ण बता दे॥ 7116॥
7रस मधुकर सम गोविंद राधे।
8रस आस्वाद्य आस्वादक बता दे॥ 7117॥
9कृष्ण के दो रूप गोविंद राधे।
10आनन्द आनन्ददाता बता दे॥ 7118॥
11शरणागत को गोविंद राधे।
12आनन्द दें कृष्ण वेद बता दे॥ 7119॥
13एक है स्वरूप शक्ति गोविंद राधे।
14एक जीव एक है माया बता दे॥ 7120॥
15हरि में स्वरूप शक्ति गोविंद राधे।
16हरि ही में जीव, माया शक्ति बता दे॥ 7121॥
17पराशक्ति, जीवशक्ति गोविंद राधे।
18माया शक्ति अध्यक्ष हरि हैं बता दे॥ 7122॥
19जग उत्पादिनी गोविंद राधे।
20शक्ति है माया अपरा बता दे॥ 7123॥
21योगमाया चिच्छक्ति गोविंद राधे।
22स्वरूप शक्ति परा शक्ति बता दे॥ 7124॥
23ऐसी है स्वरूप शक्ति गोविंद राधे।
24भगवान भी भगवत्ता भुला दे॥ 7125॥