Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
अवतार · पृष्ठ 614
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1गोलोक परव्योम गोविंद राधे।
2माया लोक स्वामी हैं कृष्ण बता दे॥ 7090॥
3परव्योम लोक में तो गोविंद राधे।
4माया काल सूर्य चन्द्र जायें ना बता दे॥ 7091॥
5गोलोक परव्योम गोविंद राधे।
6चित् शक्ति की हैं विभूति बता दे॥ 7092॥
7ब्रह्म के हैं चार पाद गोविंद राधे।
8एक अविद्या तीन दिव्य बता दे॥ 7093॥
9दिव्य पाद हैं सुविद्या गोविंद राधे।
10आनन्द और तुरीय बता दे॥ 7094॥
11भगवद्धाम सब गोविंद राधे।
12हैं तीन पाद विभूति बता दे॥ 7095॥
13मायिक धाम सब गोविंद राधे।
14एक पाद की हैं विभूति बता दे॥ 7096॥
15सूर्य चन्द्र अग्नि जहँ गोविंद राधे।
16जा ना सकें गोलोक बता दे॥ 7097॥
17हरि धाम हरि रूप गोविंद राधे।
18अपने प्रकाश ते प्रकाशित बता दे॥ 7098॥
19गोलोक में तो कृष्ण गोविंद राधे।
20षड्विकार रहित ही होते हैं बता दे॥ 7099॥
21अवतार काल में तो गोविंद राधे।
22अस्ति जायते वर्धते तक बता दे॥ 7100॥
23कृष्ण सर्वव्यापक गोविंद राधे।
24भक्तन हित नराकार हैं बता दे॥ 7101॥