Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
अवतार · पृष्ठ 612
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1हरि में लगावे जो भी गोविंद राधे।
2बुद्धि हरि माया वाको बुद्धू बना दे॥ 7066॥
3हरि में लगावे बुद्धि गोविंद राधे।
4हरि लाख चौरासी द्वार घुमा दे॥ 7067॥
5हरि में लगावे बुद्धि गोविंद राधे।
6अपनी भी रही सही बुद्धि गवाँ दे॥ 7068॥
7राम नागपाश लखि गोविंद राधे।
8गरु ड़ से ज्ञानी भी ज्ञान भुला दे॥ 7069॥
9रोते हुए राम लखि गोविंद राधे।
10संशय शिवानी का भी पतन करा दे॥ 7070॥
11हरि हरिलीला में गोविंद राधे।
12संशय साधक पतन करा दे॥ 7071॥
13श्यामा श्याम लीला तो गोविंद राधे।
14दिव्य करो रसपान बता दे॥ 7072॥
15जग में असम्भव को गोविंद राधे।
16हरि योगमाया ते सम्भव करा दे॥ 7073॥
17हरि तो योगमाया ते गोविंद राधे।
18लीला आदि ते सुखी दुखी हों बता दे॥ 7074॥
19हरि अज्ञेय किन्तु गोविंद राधे।
20चिन्मय बुद्धि ते ज्ञेय हैं बता दे॥ 7075॥
21हरि हैं अचिन्त्य किन्तु गोविंद राधे।
22चिन्मय मन ते हैं चिन्त्य बता दे॥ 7076॥
23हरि हैं अदृष्ट किन्तु गोविंद राधे।
24चिन्मय चक्षु ते हैं दृष्ट बता दे॥ 7077॥