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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

अवतार · पृष्ठ 611

Reading 109 of 452 · Source nos. 7054–7065 · Source PDF 114

1दूर ते दूर भी हैं गोविंद राधे।

2पास ते पास हैं कृष्ण बता दे॥ 7054॥

3दूर हैं अभक्त हित गोविंद राधे।

4पास भक्त हित श्री कृष्ण हैं बता दे॥ 7055॥

5उग्र भी कृष्ण हैं गोविंद राधे।

6लक्ष्मी भी डरीं नरसिंह ते बता दे॥ 7056॥

7अनुग्र नरसिंह गोविंद राधे।

8प्रह्लाद हित अति शान्त बता दे॥ 7057॥

9अघासुर बकासुर गोविंद राधे।

10वध हित कृष्ण अति वीर बता दे॥ 7058॥

11धनसुख मनसुख गोविंद राधे।

12सन्मुख हैं अति भीरु बता दे॥ 7059॥

13कृष्ण रोम रोम तो गोविंद राधे।

14अगणित ब्रह्माण्ड लिपटे बता दे॥ 7060॥

15वे ही कृष्ण यशुदा के गोविंद राधे।

16गोद में छोटे से शिशु हैं बता दे॥ 7061॥

17अचिन्त्य है हरि कर्म गोविंद राधे।

18तर्क जनि करो तर्कातीत बता दे॥ 7062॥

19अचिन्त्य भावों में गोविंद राधे।

20तर्क वितर्क वाय गर्त में गिरा दे॥ 7063॥

21“तदव्यक्तमाह” गोविंद राधे।

22सूत्र कह हरि बुद्धि पर हैं बता दे॥ 7064॥

23हरि में लगावे जो भी गोविंद राधे।

24बुद्धि बुद्धि नाम अपराध करा दे॥ 7065॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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