Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
अवतार · पृष्ठ 608
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1अगनित गुन गन गोविंद राधे।
2सुनि शुक ब्रह्म समाधि भुला दे॥ 7018॥
3भागवत का अर्थ गोविंद राधे।
4कृष्ण भक्ति द्वारा ही ज्ञेय है बता दे॥ 7019॥
5भागवत कह कृष्ण गोविंद राधे।
6सच्चिदानन्द घन तन हैं बता दे॥ 7020॥
7मायिक तनु कृष्ण गोविंद राधे।
8जो माने नरक को जाये बता दे॥ 7021॥
9कर्मों में निर्लिप्त गोविंद राधे।
10कर्म के फलों ते निःस्पृह बता दे॥ 7022॥
11यज्ञ तप आदि भोक्ता गोविंद राधे।
12सर्व लोक ईश्वर कृष्ण हैं बता दे॥ 7023॥
13प्राणियों के सुहृत् गोविंद राधे।
14विश्व में सर्वत्र व्याप्त बता दे॥ 7024॥
15सब जग उनमें है गोविंद राधे।
16वे तो हैं जग ते अतीत बता दे॥ 7025॥
17जल में हैं रस वे ही गोविंद राधे।
18चन्द्र सूर्य में हैं प्रकाश बता दे॥ 7026॥
19पृथिवी में गन्ध वे ही गोविंद राधे।
20सब जीवों के जीवन बता दे॥ 7027॥
21सब भूतों के बीज गोविंद राधे।
22बुद्धिमानों की हैं बुद्धि बता दे॥ 7028॥
23तेज वालों के तेज गोविंद राधे।
24बलवानों के हैं बल भी बता दे॥ 7029॥