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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

अवतार · पृष्ठ 607

Reading 105 of 452 · Source nos. 7006–7017 · Source PDF 110

1सर्वसिद्धिसेवित गोविंद राधे।

2सच्चिदानन्द घन तन हैं बता दे॥ 7006॥

3कोटि ब्रह्माण्ड व्याप्त गोविंद राधे।

4अवतार अवलि का बीज बता दे॥ 7007॥

5पाँच गुण कृष्ण के हैं गोविंद राधे।

6अचिन्त्य, नित्य, महाशक्ति बता दे॥ 7008॥

7हतारिगतिदायक गोविंद राधे।

8आत्मारामगणाकर्षी बता दे॥ 7009॥

9चार गुण ऐसे हैं गोविंद राधे।

10जो कृष्ण में ही और कहीं ना बता दे॥ 7010॥

11अद्भुत चमत्कारी गोविंद राधे।

12लीला कल्लोल वारिधि हैं बता दे॥ 7011॥

13अतुल्य मधुर प्रेम गोविंद राधे।

14मंडित प्रिय मंडन गुन है बता दे॥ 7012॥

15जगन्मानसाकर्षी गोविंद राधे।

16मुरली मधुर कल कूजित बता दे॥ 7013॥

17असमानोर्द्ध रूप गोविंद राधे।

18श्री विस्मापित जगत बता दे॥ 7014॥

19उपर्युक्त चौंसठ गुण गोविंद राधे।

20श्रीकृष्ण के दिव्य दिव्य हैं बता दे॥ 7015॥

21भूमि के परमाणु गोविंद राधे।

22गिन भी लो हरि गुन अमित बता दे॥ 7016॥

23सूर्य की किरणों को गोविंद राधे।

24गिन भी लो हरि गुन अमित बता दे॥ 7017॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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