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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

अवतार · पृष्ठ 605

Reading 103 of 452 · Source nos. 6982–6993 · Source PDF 108

1रस है स्वरूपानन्द गोविंद राधे।

2निज माधुर्य रस भोग बता दे॥ 6982॥

3स्वरूप शक्त्यानन्द गोविंद राधे।

4भक्तों ते माधुर्य भोग करा दे॥ 6983॥

5स्वरूप शक्त्यानन्द गोविंद राधे।

6ऐश्वर्य माधुर्य भेद दो बता दे॥ 6984॥

7श्रीकृष्ण माधुर्य गोविंद राधे।

8अत्यन्त गोपनीय रसिक बता दे॥ 6985॥

9लीला का माधुर्य गोविंद राधे।

10ब्रजरस हित तपीं कमला बता दे॥ 6986॥

11प्रेम का माधुर्य गोविंद राधे।

12विधि नहिं पायो तप करके बता दे॥ 6987॥

13वेणु का माधुर्य गोविंद राधे।

14विधि हरि हर सुधि बुधि बिसरा दे॥ 6988॥

15रूप का माधुर्य गोविंद राधे।

16स्वयं श्रीकृष्ण मोहित हों बता दे॥ 6989॥

17श्रीकृष्ण चन्द्र के तो गोविंद राधे।

18अंग अंग आनन्दकन्द बता दे॥ 6990॥

19कृष्ण में अनन्त गुण गोविंद राधे।

20मुख्य हैं चौंसठ रसिक बता दे॥ 6991॥

21अंग सन्निवेश रम्य गोविंद राधे।

22सर्व सल्लक्षणयुक्त बता दे॥ 6992॥

23रुचिर अरु तेज युक्त गोविंद राधे।

24बलशाली नित्य किशोर बता दे॥ 6993॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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