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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

अवतार · पृष्ठ 601

Reading 99 of 452 · Source nos. 6934–6945 · Source PDF 104

1आदि अन्त हीन कृष्ण गोविंद राधे।

2निखिल ब्रह्माण्डों के कर्ता बता दे॥ 6934॥

3सकल जगत के वे गोविंद राधे।

4निमित्तोपादान हेतु बता दे॥ 6935॥

5अव्यय अक्षर गोविंद राधे।

6अव्यक्त प्रणवाक्षर हैं बता दे॥ 6936॥

7अचर अनन्त कृष्ण गोविंद राधे।

8धाता अजन्मा अविनाशी बता दे॥ 6937॥

9अविकारी ब्रह्म कृष्ण गोविंद राधे।

10विश्वरूप निर्गुण भी हैं बता दे॥ 6938॥

11पुरुष परमात्मा हैं गोविंद राधे।

12सर्वव्यापी सर्वकर्ता कृष्ण बता दे॥ 6939॥

13जगत्पिता जगत्पति गोविंद राधे।

14जगत ते अतीत भी हैं कृष्ण बता दे॥ 6940॥

15सर्वज्ञ सर्ववित् गोविंद राधे।

16सर्वशक्तिमान श्रीकृष्ण हैं बता दे॥ 6941॥

17चर को अचर अरु गोविंद राधे।

18अचर को चर श्रीकृष्ण बना दे॥ 6942॥

19कृष्ण ते प्रकट जग गोविंद राधे।

20कृष्ण ते रक्षित पुनि लीन बता दे॥ 6943॥

21ज्ञान विज्ञान रूप गोविंद राधे।

22पूर्णतम परब्रह्म कृष्ण हैं बता दे॥ 6944॥

23योगेश्वरेश्वर गोविंद राधे।

24पुरुष अरु प्रकृति के स्वामी बता दे॥ 6945॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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