Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
अवतार · पृष्ठ 598
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1उनका भी ऐश्वर्य गोविंद राधे।
2मानव के मन भाया ना बता दे॥ 6898॥
3जीव अल्पज्ञ अरु गोविंद राधे।
4अल्पशक्ति और अकिंचन बता दे॥ 6899॥
5हरि सर्वज्ञ अरु गोविंद राधे।
6सर्वशक्तिमान भगवान हैं बता दे॥ 6900॥
7इतनी बड़ी है दूरी गोविंद राधे।
8जीव प्रेम कैसे करे ब्रह्म ते बता दे॥ 6901॥
9एक भिक्षुकी को हो गोविंद राधे।
10सम्राट ते प्रेम कैसे बता दे॥ 6902॥
11राम द्विभुज किंतु गोविंद राधे।
12मर्यादा पुरुषोत्तम बता दे॥ 6903॥
13शूर्पणखाकाण्ड गोविंद राधे।
14सब को डरा दे प्रेम कैसे हो बता दे॥ 6904॥
15जब गोप गोपियों के गोविंद राधे।
16साजात्य बनि आये ब्रज में बता दे॥ 6905॥
17तब निःसंकोच गोविंद राधे।
18नर नारियों का प्रेम हो गया बता दे॥ 6906॥
19कृष्ण अवतार ऐसा गोविंद राधे।
20लता पता को भी दिव्य पे्रेम दिला दे॥ 6907॥
21कृष्ण अवतार ऐसा गोविंद राधे।
22ब्रह्मलीन को भी ब्रज वृक्ष बना दे॥ 6908॥
23कृष्ण अवतार ऐसा गोविंद राधे।
24पूतना को भी हरि धाम दिला दे॥ 6909॥